डेली न्यूज़ टाइम्स.... ( जिया उल्ला खान )...
बिलासपुर.....
ठंडी हवाओं में काँपते नन्हें हाथ,
सपनों से भरी आँखें
और उन सपनों को बचाने की सामूहिक ज़िम्मेदारी—
इन्हीं भावनाओं के साथ सहयोग फ़ाउंडेशन एवं स्वयंसिद्धा फाउंडेशन ने स्वेटर वितरण कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को ठंड से बचाना नहीं, बल्कि उनके माता-पिता को यह संदेश देना भी है कि शिक्षा ही वह रोशनी है जो बच्चों के भविष्य को संवार सकती है। संस्था का मानना है कि जब माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हैं, तभी समाज का भविष्य सुरक्षित होता है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हर माँ-बाप अपने छोटे-बड़े सपनों से पहले एक सपना ज़रूर देखें—
अपने बच्चे को पढ़ाकर उसे वह ज़िंदगी देना, जिसे पाने का उन्होंने हमेशा सपना देखा।
इसी सोच के साथ शासकीय प्राथमिक शाला, तारबहार में स्वेटर वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के 112 बच्चों को स्वेटर वितरित किए गए। नन्हीं हथेलियों में स्वेटर, चेहरों पर मुस्कान और आँखों में भरोसा—यह दृश्य इंसानियत की सच्ची तस्वीर पेश कर रहा था।
यह कार्यक्रम सिर्फ़ स्वेटर बाँटने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बच्चों के सपनों को ठंड से बचाने, उन्हें सुरक्षा और अपनत्व का एहसास दिलाने की एक कोशिश थी।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से
चंचल सलूजा (अध्यक्ष, स्वयंसिद्धा फाउंडेशन)
किरण सिंह (सहयोग फाउंडेशन)
पूजा तिवारी (प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला तारबहार)
शिक्षिकाएँ श्रीमती ईश्वरी अय्यर, श्रीमती माधुरी निर्मलकर, श्रीमती शिखा रॉबिन्स
श्रीमती राजिम खुटले
उपस्थित रहीं।
संस्थाओं ने अपील की कि समाज के हर व्यक्ति को आगे आकर ऐसे प्रयासों में सहभागी बनना चाहिए, ताकि
कोई बच्चा ठंड से न काँपे,
कोई सपना गरीबी में न जमे,
और हर दिल में उम्मीद की गर्माहट बनी रहे।