डेली न्यूज़ टाइम्स... ( जिया उल्ला खान )....
बिलासपुर। थाना कोनी पुलिस की प्रभावी और त्वरित विवेचना के चलते न्यायालय ने एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो विधि से संघर्षरत किशोरों को दोषी ठहराया है। माननीय किशोर न्याय बोर्ड, बिलासपुर ने दोनों दोषियों को 3 वर्ष के लिए संप्रेषण गृह भेजने की सजा सुनाई है।
मार्च 2024 का है मामला
घटना मार्च 2024 की है, जब थाना कोनी में 5 वर्षीय बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर वैज्ञानिक और विधिसम्मत तरीके से जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए, चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और साक्ष्यों के आधार पर दो किशोरों को हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया गया।
विवेचना को कोर्ट ने माना त्रुटिरहित
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों किशोरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(डी)(बी) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धाराओं के तहत किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आरोप पत्र पेश किया। मामले की सुनवाई करते हुए किशोर न्याय बोर्ड, बिलासपुर ने अपने फैसले में कहा कि विवेचना अधिकारी द्वारा की गई पूरी जांच निष्पक्ष, विधिसम्मत और त्रुटिरहित थी। साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी पाते हुए 3 साल की सजा सुनाई गई।
पुलिस टीम की सराहना और पुरस्कार की घोषणा
इस संवेदनशील मामले की पूरी जांच तत्कालीन थाना प्रभारी (निरीक्षक) गोपाल सतपथी द्वारा की गई थी। उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (DIG/SSP), बिलासपुर ने इस बेहतरीन और प्रभावी जांच के लिए निरीक्षक गोपाल सतपथी की सराहना की है और उन्हें उचित पुरस्कार देने की घोषणा की है।