डेली न्यूज़ टाइम्स... ( जिया उल्ला खान )
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही...
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 30 दिसंबर 2025 को गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे को महंत के गढ़ में “भूपेश की दस्तक” के रूप में देखा जा रहा है।
इसी दिन नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इस कार्यक्रम से क्षेत्र की एकमात्र कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को दूर रखे जाने की चर्चा ने सियासी गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है।
शपथ ग्रहण नहीं, सियासी संदेश का मंच
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम संगठन के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान और भविष्य के सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि यह शपथ ग्रहण समारोह अब केवल औपचारिक कार्यक्रम न रहकर, एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने वाला मंच माना जा रहा है।
गुटबाजी खुलकर आई सामने
बताया जा रहा है कि जिले के कई संगठन पदाधिकारी, कांग्रेस के निर्वाचित जनप्रतिनिधि, दोनों पूर्व जिला अध्यक्ष और अनेक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गजमती भानु के जिला अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में पूर्व जिला अध्यक्षों के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मनेंद्रगढ़ में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात की थी। इस दौरान गजमती भानु पर आरएसएस के धर्म जागरण मंच से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए उनका विरोध दर्ज कराया गया
इस्तीफे की पेशकश और “घर की बात घर में”
सूत्रों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल ने इस्तीफे की पेशकश भी की थी, जिस पर प्रदेश नेतृत्व ने यह कहकर मामला शांत करने की कोशिश की कि “घर की बात घर के अंदर ही सुलझाई जाएगी।” इस सहमति पर जिले के कांग्रेसी नेता फिलहाल कायम भी रहे।
हालांकि, बीते दिनों कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के मीडिया बयान के बाद यह विवाद सार्वजनिक हो गया, जिससे संगठन के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई।
जिला राजनीति पहुंची प्रदेश तक
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में शुरू हुई यह गुटबाजी अब प्रदेश स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे कांग्रेस संगठन के भीतर बढ़ते तनाव के संकेत साफ नजर आने लगे हैं।
अब सबकी निगाहें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दौरे और मंच से दिए जाने वाले राजनीतिक संदेश पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दौरा कांग्रेस संगठन को एकजुट करेगा या फिर अंदरूनी मतभेदों को और उजागर करेगा
भाजपा की भी पुष्टि
उल्लेखनीय है कि जिले के भाजपा नेताओं ने भी इस बात की पुष्टि करने का दावा किया है कि नवनियुक्त जिला अध्यक्ष गजमती भानु पूर्व में आरएसएस के धर्म जागरण मंच से जुड़ी रही हैं, जिससे कांग्रेस के भीतर विवाद और गहरा गया है।