डेली न्यूज़ टाइम्स.... मोहम्मद शाकिब खान...
गौरेला (छत्तीसगढ़) – गौरेला शहर एक बार फिर साम्प्रदायिक तनाव और कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। एक ओर जहां दो बालिगों द्वारा आपसी सहमति से की गई शादी को लेकर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शहर में अशांति फैलाने की कोशिश की गई, वहीं अब हाल ही में हुई हिंसक घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले गौरेला के एक मुस्लिम युवक और एक ब्राह्मण महिला, जो पेशे से शिक्षिका हैं, ने आपसी सहमति से कोट मैरिज कर ली थी। दोनों बालिग थे और यह विवाह पूरी तरह वैधानिक था। लेकिन इस विवाह को लेकर शहर में कुछ कट्टरपंथी संगठनों और नेताओं ने लव जिहाद का नाम देकर भारी विरोध प्रदर्शन किया। शहर बंद कराया गया और रैली निकाल कर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए गए।
भड़काऊ नारों में शामिल था आयुष पांडेय का नाम
इस रैली में आयुष पांडेय नामक युवक का नाम सामने आया, जो वीडियो फुटेज में "शाकिब काटा जाएगा, अल्लाह-अल्लाह चिल्लाएगा" जैसे उग्र और साम्प्रदायिक नारे लगाते हुए साफ दिखाई दिया। यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा के बीच हुआ, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
रात के अँधेरे मे मुस्लिम परिवार पर हमला
शहर अभी इस तनाव से उबर भी नहीं पाया था कि कल रात एक और बड़ी घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया। आरोप है कि रात करीब 12 बजे आयुष पांडेय अपने 10–15 साथियों के साथ राजा नामक मुस्लिम युवक के घर में जबरन घुस गया। वहाँ पर न सिर्फ राजा और उसके परिवार को मारा-पीटा गया, बल्कि घर की महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई।
पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई है। न तो आयुष पांडेय को हिरासत में लिया गया है, और न ही उसके साथियों के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज हुई है। इससे मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
क्या है पीछे की सच्चाई?
कुछ सूत्रों का कहना है कि इस हमले के पीछे किसी पुराने प्रेम प्रसंग की भूमिका हो सकती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर किसी को किसी से शिकायत है, तो उसके लिए कानून का रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया? क्या अब हर व्यक्ति को अपने हिसाब से कानून हाथ में लेने की छूट मिल गई है?
प्रशासन के मौन पर सवाल
इस पूरी घटना ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या गौरेला जैसे छोटे शहर में कुछ असामाजिक तत्वों को खुली छूट दी जा रही है? क्या इन घटनाओं के पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण भी है?
मुस्लिम समुदाय में रोष
घटना के बाद से मुस्लिम समुदाय के लोग डरे हुए हैं और अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वे सवाल उठा रहे हैं कि अगर रात के अंधेरे में कोई व्यक्ति उनके घर में घुस कर मारपीट कर सकता है और पुलिस मौन रह सकती है, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
अब सबकी निगाहें गौरेला के पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब कर रह जाएगा।
---