बिलासपुर रेलवे स्टेशन में आरपीएफ और अधिकारियों की मिलीभगत से बिना लाइसेंस के चल रही चाय फेरी, लाइसेंसधारियों को किया जा रहा दरकिनार

डेली न्यूज़ टाइम्स.... जिया उल्ला खान...
बिलासपुर....
बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों चाय फेरी के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। स्टेशन परिसर और ट्रेनों में बिना लाइसेंस और यूनिफॉर्म के कुछ लोग चाय बेचते देखे जा रहे हैं, जिन पर न तो किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और न ही उन्हें रोका जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के पास वैध लाइसेंस, पहचान पत्र और यूनिफॉर्म है, उन्हें फेरी करने की अनुमति नहीं दी जाती। यह सीधा-सीधा भेदभाव और अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने का मामला है

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सब कुछ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और कुछ अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है। आरोप है कि बिना लाइसेंस के चाय बेचने वालों को आरपीएफ की मौन स्वीकृति प्राप्त है और इन्हें किसी प्रकार की पूछताछ या रोक-टोक नहीं होती। वहीं, जिन वेंडरों ने नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस लिया है, वे केवल स्टॉल तक सीमित रह गए हैं। उन्हें ट्रेन में फेरी करने की अनुमति नहीं है।

सबसे गंभीर आरोप एक व्यक्ति "रुखिया" नामक शख्स पर लग रहा है, जो कथित तौर पर आरपीएफ और अधिकारियों से सांठगांठ कर करीब 8 लोगों को स्टेशन परिसर और ट्रेनों में चाय फेरी का काम दिलवा रहा है। इन फेरी वालों में से कई नशेड़ी और संदिग्ध प्रवृत्ति के बताए जाते हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है। ट्रेनों में चोरी, झपटमारी जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जब स्टेशन के बाहर के होटल और चाय ठेलों को हटा दिया गया है, तो फिर रुखिया नामक व्यक्ति स्टेशन परिसर में चाय बनाकर ट्रेनों में कैसे बेच सकता है? यह बिना अंदरूनी समर्थन के मुमकिन नहीं लगता। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति रेलवे पुलिस और अधिकारियों के घरों में मेहमाननवाज़ी करके, रिश्वत जैसे तरीकों से यह सब करवा रहा है।

प्रश्न उठते हैं:

क्या रेलवे प्रशासन इस खुले अवैध व्यापार से अनजान है?

क्या आरपीएफ की मिलीभगत के बिना यह संभव है?

जब लाइसेंसधारी फेरी नहीं कर सकते, तो बगैर अनुमति वाले लोग कैसे धड़ल्ले से फेरी कर रहे हैं?

अगर ट्रेन में चोरी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?


यह पूरा मामला रेलवे की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। रेलवे को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए और जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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