कोटा में अवैध प्लॉटिंग का खेल! नियमों को ताक पर रखकर काटे जा रहे छोटे-छोटे प्लॉट, प्रशासन पर उठे सवाल

डेली न्यूज़ टाइम्स.... ( जिया उल्ला खान )...

बिलासपुर। जिले के कोटा क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और जमीनों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटवारे का मामला चर्चा में है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों के बावजूद कृषि भूमि को छोटे हिस्सों में विभाजित कर उसकी रजिस्ट्री कराई जा रही है, जिससे अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिल रहा है। मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुकी है और कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता अधिवक्ता देवेंद्र सिंह ठाकुर ने प्रशासन को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कोटा क्षेत्र में कई स्थानों पर शासन के नियमों के विपरीत 5 डिसमिल से कम क्षेत्रफल वाली जमीनों की रजिस्ट्री की जा रही है। जबकि अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 5 डिसमिल यानी लगभग 2178 वर्गफुट से कम जमीन की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

शिकायत में विशेष रूप से ग्राम नवागांव के खसरा नंबर 1129 का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उक्त भूमि को 1129/1, 1129/2, 1129/3 और 1129/4 जैसे हिस्सों में विभाजित कर छोटे-छोटे प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। इनमें कई प्लॉट 5 डिसमिल से भी कम क्षेत्रफल के बताए जा रहे हैं।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि बिलासपुर-कोटा मार्ग पर स्थित एक निजी निर्माण कंपनी द्वारा भी बिना वैधानिक अनुमति जमीनों का व्यावसायिक विभाजन कर बिक्री की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रकार की गतिविधियों से न केवल अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं, बल्कि शासन को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।

मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि यदि रजिस्ट्री और भूमि विभाजन की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा होता तो इस तरह छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन की बिक्री संभव नहीं होती। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की जांच कर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि शासन ने अवैध कॉलोनियों और अनियंत्रित प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए 5 डिसमिल से कम भूमि की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद यदि जमीनों का छोटे हिस्सों में क्रय-विक्रय हो रहा है तो यह नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन इस मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और अवैध प्लॉटिंग के आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।

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