डेली न्यूज़ टाइम्स.. ( जिया उल्ला खान ).....
रायपुर। रायपुर रेंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले दो फरार मुख्य आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष परिहार और लक्ष्मन देवासी के रूप में हुई है, जिनके खिलाफ देशभर के करीब 13 साइबर सेल और थानों में शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देश पर रेंज साइबर थाना टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई को अंजाम दिया
📌 ऐसे हुआ मामला दर्ज
ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम के माध्यम से अधिक मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगी की शिकायतें थाना राखी और धरसीवां में दर्ज की गई थीं।
प्रार्थी पारस कुमार धीवर ने थाना राखी में शिकायत दर्ज कराई कि उनसे लगभग 24 लाख रुपये की ठगी की गई।
प्रार्थी ललित साहू ने थाना धरसीवां में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनसे करीब 34 लाख रुपये ठग लिए गए।
दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
🔎 तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क
विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम एप से प्राप्त डेटा का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। जांच में एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ जो फर्जी जॉब ऑफर देकर लोगों को टास्क पूरा करने के नाम पर पैसे जमा करवाता था।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम को राजस्थान और महाराष्ट्र भेजा गया। पहले चरण में तीन आरोपी—
भवानी सिंह (अजमेर)
उत्पल पंचारिया (जोधपुर)
साहिल संतोष (नासिक)
को गिरफ्तार किया जा चुका था।
इसके बाद मुख्य आरोपी आशीष परिहार (जिला अजमेर) और लक्ष्मन देवासी (जिला पाली) को भी गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
⚠️ कैसे करते थे ठगी
गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को “आसान काम–ज्यादा कमाई” का लालच देता था। शुरुआत में छोटे टास्क के बदले पैसे देकर भरोसा जीतते और बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर संपर्क तोड़ देते थे।
🛡️ पुलिस की अपील: ऐसे रहें सावधान
किसी भी जॉब के लिए फीस न दें।
कंपनी की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।
अनजान लिंक, QR या APK डाउनलोड से बचें।
OTP, UPI या बैंक जानकारी साझा न करें
संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाना में शिकायत करें।