डेली न्यूज़ टाइम्स... ( जिया उल्ला खान )...
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन की जिला इकाई बिलासपुर द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ‘मोदी की गारंटी’ के तहत किए गए वादों को शीघ्र लागू करने और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों की 11 सूत्रीय ज्वलंत मांगों का त्वरित निराकरण करने की मांग की गई है।
फेडरेशन ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनभोगी लंबे समय से केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) एवं महंगाई राहत (DR) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन में फेडरेशन ने कई अहम मांगों को प्रमुखता से उठाया है, जिनमें—
लंबित डीए एरियर्स: वर्ष 2019 से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स की राशि कर्मचारियों के जीपीएफ (GPF) खाते में समायोजित की जाए।
वेतन विसंगति का निराकरण: पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
समयमान वेतनमान: 8, 16, 24 एवं 32 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर चार स्तरीय पदोन्नत समयमान वेतनमान लागू किया जाए।
अवकाश नकदीकरण: मध्य प्रदेश की तर्ज पर अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सीमा 300 दिवस तक बढ़ाई जाए।
नियमितीकरण और अनुकंपा नियुक्ति
फेडरेशन ने कार्यभारित, दैनिक वेतनभोगी, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति में लागू 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर सभी रिक्त पदों पर नि:शर्त नियुक्ति देने की मांग की गई है।
अन्य महत्वपूर्ण मांगें
सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान।
नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं
समयबद्ध पदोन्नति।
प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा की शुरुआत।
सेवानिवृत्ति आयु में समानता लाते हुए इसे 65 वर्ष किया जाए।
ऑनलाइन उपस्थिति हेतु मोबाइल ऐप (VSK) की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो फेडरेशन से संबद्ध 120 मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त संगठन 29 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। फेडरेशन ने प्रशासन पर कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
अंत में फेडरेशन ने राज्य सरकार से अपील की है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में शीघ्र निर्णय लेकर आंदोलन की स्थिति से बचा जाए।