डेली न्यूज़ टाइम्स... जिया उल्ला खान...
बिलासपुर
जहां देश के खिलाड़ी ओलंपिक और नेशनल गेम्स जैसे मंचों पर देश का गौरव बढ़ाने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं बिलासपुर रेलवे के बॉक्सिंग रिंग से एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, स्पोर्ट्स ऑफिसर श्रीकांत पहाड़ी के जन्मदिन के अवसर पर रेलवे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित बॉक्सिंग रिंग में खुलेआम शराब पार्टी और बकरा पार्टी का आयोजन किया गया।
खेल का मैदान, जहां खिलाड़ियों को अभ्यास और अनुशासन सिखाया जाना चाहिए, वहां अधिकारियों और कोचों ने मयखाना बना दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस रात न केवल शराब परोसी गई बल्कि देर रात तक तेज आवाज़ में गाने बजाए गए और जमकर मौज-मस्ती की गई।
कई खिलाड़ियों ने इस अनुशासनहीनता का विरोध करने की कोशिश की, लेकिन अधिकारी वर्ग के दबाव में कोई आवाज़ ज़्यादा देर तक नहीं उठ पाई।
स्पोर्ट्स ऑफिसर पर गंभीर सवाल
बताया जा रहा है कि इस पूरे आयोजन की पहल खुद स्पोर्ट्स ऑफिसर श्रीकांत पहाड़ी ने की थी।
उन्हीं के जन्मदिन के बहाने खेल मैदान को पार्टी स्थल बना दिया गया।
खिलाड़ियों के मुताबिक, “कोचों और अधिकारियों ने जिस तरह से बॉक्सिंग रिंग में शराब और नॉनवेज पार्टी की, उससे पूरे खेल परिसर की गरिमा दागदार हो गई।”
यह वही जगह है जहां हर सुबह खिलाड़ी अभ्यास करते हैं और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन उसी पवित्र स्थान को पार्टी और नशे के माहौल में बदल दिया गया।
कोचों की करतूतों से बदनाम हो रहा खेल परिसर
मौजूद कोचों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
खेल सिखाने और अनुशासन की मिसाल बनने वाले यही कोच जब शराब की बोतल हाथ में लेकर जश्न मनाने लगते हैं, तो खिलाड़ियों के मन में क्या संदेश जाएगा?
कई लोगो ने कहा है कि “ इस हरकत ने खेल के प्रति ये ना सिर्फ धब्बा हैँ बल्कि जो एक सच्चा स्पोर्ट्स पर्सन हैँ उसका भी अब आत्मविश्वास तोड़ने जैसा हैँ
खेल की आत्मा को किया अपमानित
खेल भावना का उद्देश्य अनुशासन, समर्पण और प्रेरणा है।
लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही नियम तोड़ने लगें, तो यह न केवल रेलवे खेल संगठन बल्कि पूरे खेल तंत्र की साख पर प्रश्नचिह्न लगा देता है।
ऐसी घटनाएँ खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ती हैं और उस व्यवस्था को कलंकित करती हैं जो खेल को संस्कार और सम्मान से जोड़ती है।
अब देखना यह है कि कार्रवाई कौन करेगा
इस पूरे प्रकरण ने रेलवे खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या इस मामले में कोई जांच होगी?
क्या उन अधिकारियों और कोचों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने खेल परिसर को शराबखोरी का अड्डा बना दिया?
या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा — यह आने वाला वक्त बताएगा।