खुद की किडनैपिंग या किसी साजिश की पटकथा? — बिलासपुर पुलिस के लिए रहस्यमय बन गया जशपुर का युवक संजय यादव का मामला

डेली न्यूज़ टाइम्स... जिया उल्ला खान...

बिलासपुर। रहस्यमय तरीके से लापता हुए जशपुर के युवक संजय कुमार यादव का मामला अब बिलासपुर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। युवक के मोबाइल से मिले संकेत और उसके पिता को आए “फिरौती कॉल” ने इस पूरे घटनाक्रम को और उलझा दिया है।
अब सवाल उठने लगा है — क्या वाकई संजय का अपहरण हुआ है, या उसने खुद अपनी किडनैपिंग की कहानी रची है?



किराये के मकान में रह रहा था पिछले 10 साल से

मुख्यमंत्री जिले जशपुर का रहने वाला संजय कुमार यादव पिछले दस सालों से बिलासपुर में किराये के मकान में रह रहा था। घरवालों को उसने बताया था कि वह किसी बैंक से जुड़ा काम करता है। आसपास के लोगों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का युवक था और अकेले ही किराये के मकान में रहता था।


1 अक्टूबर की रात आखिरी बार पिता से हुई बात

घटना की शुरुआत 1 अक्टूबर की रात से हुई, जब संजय ने अपने पिता को फोन कर बताया कि वह गांव लौट रहा है। परिवार वाले उसका इंतजार करते रहे, लेकिन रात बीतने के बाद भी वह घर नहीं पहुंचा।
थोड़ी देर बाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। जब परिवार ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो फोन लगातार बंद मिला।


पिता पहुंचे बिलासपुर, मकान में लगा ताला

अगले दिन 2 अक्टूबर को पिता खुद बिलासपुर पहुंचे। जब उन्होंने बेटे के किराये के मकान में देखा, तो वहां ताला बंद था। आसपास किसी को उसकी कोई जानकारी नहीं थी। यही से संजय की तलाश और चिंता दोनों शुरू हुई।


तीन दिन बाद आया फिरौती का कॉल

तीन दिन बाद यानी 3 अक्टूबर को परिवार के होश उड़ गए, जब संजय के पिता को खुद संजय का ही फोन आया।
फोन पर उसने कहा —

“पापा, आठ-दस लोगों ने मुझे उठा लिया है… वो लोग मुझे छोड़ने के लिए 10 लाख रुपये मांग रहे हैं… पैसे मेरे ही बैंक अकाउंट में डाल दो।”

जब पिता ने घबराकर पूछा कि कौन लोग हैं और कहां रखा गया है, तो वह बार-बार यही दोहराता रहा कि पैसे उसी के खाते में डाल दिए जाएं।
यहीं से पुलिस को शक की पहली लकीर मिली — अगर अपहरण हुआ है, तो फिरौती की रकम अपहरणकर्ता के खाते में क्यों नहीं, बल्कि उसके अपने खाते में क्यों?


मोबाइल लोकेशन ने बढ़ाई उलझन

साइबर सेल की जांच में संजय का मोबाइल लोकेशन लगातार बदलता पाया गया।
कभी लोकेशन बिलासपुर, तो कभी गौरेला, और कभी रायगढ़ में दिखाई दी। बार-बार मोबाइल का ऑन और ऑफ होना, और हर बार नई जगह से नेटवर्क पकड़ना, पुलिस के लिए मामले को और पेचीदा बना रहा है।


पुलिस की कई टीमें जुटी जांच में

बिलासपुर सिविल लाइन पुलिस ने युवक की तलाश के लिए कई टीमों को अलग-अलग दिशा में रवाना किया है।
साइबर सेल मोबाइल और कॉल डिटेल्स की बारीकी से जांच कर रही है, जबकि थाना कोतवाली और क्राइम ब्रांच की टीम फिजिकल सर्च में लगी है।
पुलिस ने कहा है कि “हम हर संभावना पर जांच कर रहे हैं — मामला अपहरण का भी हो सकता है या फिर आत्म-अपहरण (फर्जी किडनैपिंग) का भी।”


अब तक कोई ठोस सुराग नहीं

6 अक्टूबर तक पुलिस को न तो संजय का कोई सीधा सुराग मिला है और न ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है।
हालांकि, जांच अधिकारी का कहना है कि जल्द ही मोबाइल डेटा और बैंक ट्रांजेक्शन से पूरा सच सामने आ जाएगा।


क्या है सबसे बड़ा सवाल

इस पूरे मामले में तीन बातें अब तक सबसे रहस्यमय बनी हुई हैं —

  1. फिरौती के लिए खुद का बैंक अकाउंट बताना।
  2. मोबाइल लोकेशन का लगातार बदलना।
  3. अपहरण के बाद भी परिवार से सीधे संपर्क करन

बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जब तक युवक बरामद नहीं होता, तब तक किसी नतीजे पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
फिलहाल जांच जारी है — और पूरा जिला इस रहस्यमयी ‘किडनैपिंग कॉल’ के पीछे के सच का इंतजार कर रहा है।



Post a Comment

Previous Post Next Post