सकरी में अंधेरी रातों का उजाला — जुए के ठिकानों पर नालदारों का कब्ज़ा, पुलिस ‘मौन दर्शक

बिलासपुर....
सकरी थाना क्षेत्र का माहौल इन दिनों “कानून के साए” से ज़्यादा “नालदारों के हुक्म” में चल रहा है। घुरू-अमेरी इलाके में हर रात खुलने वाला जुए का ठिकाना अब खुला राज बन चुका है — जहाँ रात 11 बजे से ताश की महफ़िल सजती है और सुबह तक नोटों की बरसात होती है।


प्रतिकात्मक फोटो

यह कोई साधारण फड़ नहीं, बल्कि “संगठित खेल” है। सूत्र बताते है कि इसका संचालन बुट्टी नाम का पुराना खिलाड़ी करता है, जो मुख्य नालदार अपने ही घर के पीछे “कैसीनो स्टाइल” में फड़ सजवाता है। प्रवेश शुल्क तय है — ₹1000 प्रति जुआरी और जीतने पर देना पड़ता है 10% ‘नाल टैक्स’।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा के लिए करीब 10 चौकीदारों की टीम फड़ के आसपास तैनात रहती है, जिनका काम सिर्फ इतना है कि पुलिस की भनक तक न लगे। लेकिन इलाके के लोगों को अब डर सताने लगा है — देर रात मोटरसाइकिलों की आवाज़ें, फुसफुसाहटें और “तीन इक्के लग गए” की गूंज उन्हें बेचैन कर रही है।

बस्ती के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —

“पहले ये सब बंद था, लेकिन नए थाना प्रभारी के आने के बाद सब फिर शुरू हो गया। अब तो घर के बाहर खड़े होने में भी डर लगता है, कौन कब गोली चला दे, पता नहीं।”

पुलिस को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक न कोई दबिश, न कोई कार्रवाई।
लोग तंज कसते हैं —

“थाने में शायद ताश की ट्रेनिंग क्लास चल रही है — कैसे पकड़ा जाए बिना पकड़े।”

सूत्र बताते हैं कि फड़ की पूरी जानकारी पुलिस को है, पर दबिश का समय नालदार ही तय करते हैं। खबर वायरल होते ही फड़ किसी दूसरी बस्ती में “शिफ्ट” हो जाता है और पुलिस वहाँ भी ‘सर्वे’ में व्यस्त नज़र आती है।

आख़िरकार सवाल वही —
“सकरी में कानून कौन चलाता है — थाना प्रभारी या ताश के नालदार?”

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