डेली न्यूज़ टाइम्स.. जिया उल्ला खान
गौरेला छत्तीसगढ़ — जिले के भोले-भाले मजदूरों को दूसरे राज्यों में काम दिलाने का झांसा देकर उनका शोषण करने का गंभीर आरोप लेबर ठेकेदार निरंजन प्रसाद टंडिया पर लगा है। यह मामला तब सामने आया जब भास्कुरा पिपरिया के मजदूर साहिल पुरी और कारन पुरी ने राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के जिला अध्यक्ष इदरीस अंसारी से संपर्क कर अपनी पीड़ा साझा की।
मजदूरी नहीं मिलने की लिखित शिकायत
दोनों मजदूरों ने बताया कि वे टंडिया के माध्यम से दूसरे राज्य में काम करने गए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें पूरी मजदूरी नहीं मिली। शिकायत के बाद इंटक अध्यक्ष ने कहा कि पहले मामले की सच्चाई जाननी जरूरी है, जिसके बाद उन्होंने इंटक की टीम को जांच के लिए भेजा।
जांच में उजागर हुआ बड़ा मामला
इंटक टीम की जांच में यह सामने आया कि निरंजन टंडिया वर्षों से मजदूरों को अधिक मजदूरी का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेजता है, और वहां उन्हें या तो आधी मजदूरी दी जाती है या फिर महीनों टालमटोल कर भुगतान से बचा जाता है। साथ ही यह भी पता चला कि टंडिया ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए कई नाबालिग मजदूरों को भी बाहर काम पर भेजा था।
संपर्क करने पर भी नहीं मिला जवाब
जब इंटक अध्यक्ष ने खुद टंडिया से संपर्क कर पक्ष रखने के लिए बुलाया, तो उसने पहले आने का वादा किया लेकिन बाद में फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क से पूरी तरह गायब हो गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपों में सच्चाई है।
एसपी को सौंपा गया शिकायत पत्र
इंटक अध्यक्ष इदरीस अंसारी ने मामले की पूरी जानकारी पुलिस अधीक्षक श्री भगत को सौंपते हुए लिखा कि:
- टंडिया ने बगैर अनुमति व दस्तावेज मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजा, जो कानूनी अपराध है।
- जब मजदूरों को बाहर भेजा गया, उस समय वे नाबालिग थे।
- मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
- मजदूरों को धमकाने की भी शिकायत सामने आई है।
उन्होंने मांग की है कि निरंजन प्रसाद टंडिया के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर कड़ी कार्रवाई की जाए और मजदूरों की बकाया मजदूरी तत्काल दिलाई जाए।
ऐसे ही एक अन्य मामले में भी इंटक की सक्रियता
इससे पहले भी कटनी जिले के मजदूरों का मामला सामने आया था, जिसमें वन विभाग मरवाही मढ़ना डिपो के बीट गार्ड ओम चंद, डिप्टी रेंजर तिवारी और रेंजर बंजारे ने बिना दस्तावेज मजदूरों से काम करवाया और मजदूरी नहीं दी। उस वक्त भी इंटक अध्यक्ष ने डीएफओ मैडम से मिलकर मजदूरी दिलवाई थी। बाद में यह भी पता चला कि मजदूरों को आधी मजदूरी दी गई थी, जिसके बाद दोबारा प्रयास कर शेष राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई।
बिना प्रक्रिया मजदूर भेजना कानूनन अपराध
भारत सरकार और राज्य सरकार ने मजदूरों की सुरक्षा हेतु सख्त कानून बनाए हैं। किसी भी मजदूर को दूसरे राज्य भेजने से पहले उसके:
- पहचान पत्र
- श्रम पंजीयन
- आधार कार्ड
- बैंक खाता
- और पुलिस सत्यापन
अनिवार्य हैं। इसके अलावा स्थानीय थाने में जानकारी देना भी जरूरी होता है। टंडिया ने इनमें से कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई।
अब सख्त कार्रवाई की तैयारी
इंटक अध्यक्ष इदरीस अंसारी ने स्पष्ट कहा है कि अब ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो गरीब आदिवासी व ग्रामीण मजदूरों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में ले जाकर उनका शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और कानून के सहयोग से मजदूरों को न्याय दिलाने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।