“बिलासपुर में पत्रकार पर हमला: लोकतंत्र के प्रहरी कब तक असुरक्षित?” प्रेस क्लब बिलासपुर ने रखी एसएसपी के सामने मुख्य मांगे

डेली न्यूज़ टाइम्स... जिया उल्ला खान....


बिलासपुर, 24 मई 

बिलासपुर शहर में एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। बीती रात दैनिक समाचार पत्र में कार्यरत फोटो जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता और उनके पिता पर कुछ शराबी और नशेड़ी तत्वों ने जानलेवा हमला किया। यह वारदात 23 और 24 मई की दरम्यानी रात की है, जिसने पूरे पत्रकार समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।


घटना के बाद प्रेस क्लब में शनिवार को एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें शहर के तमाम पत्रकारों ने भारी संख्या में भाग लिया। बैठक में हमले की कड़ी निंदा करते हुए अपराधियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र की रक्षा कैसे संभव होगी?

पत्रकारों की एकजुटता, पुलिस से की गुहार
प्रेस क्लब अध्यक्ष इरशाद अली की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मुलाकात की और एक मांग-पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष संजीव पांडेय, सचिव दिलीप यादव सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकार शामिल रहे। इस पत्र में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:

  • हमलावरों पर गुंडा एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई
  • पत्रकारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए
  • पुलिस-पत्रकार समन्वय के लिए प्रत्येक थाना स्तर पर आपसी संवाद की स्थायी व्यवस्था
  • आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता हेतु क्षेत्रवार पत्रकारों की सूची और जानकारी थानों में उपलब्ध कराई जाए
  • फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं

SSP ने दिए ठोस आश्वासन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। जिन आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से है, उनके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में संबंधित पत्रकारों की सूची रखने और एक संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की योजना भी जल्द लागू की जाएगी।


फर्जी पत्रकारों पर भी होगी कार्रवाई
प्रेस क्लब ने यह भी मांग रखी कि कुछ कथित पत्रकार पुलिस के कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं और पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें पत्रकार बिरादरी से अलग किया जाए। क्लब ने अपील की है कि ऐसे तत्वों की सूचना प्रेस क्लब अथवा मान्यता प्राप्त संस्थाओं को दी जाए।

समाज और प्रशासन को एकजुट होने की जरूरत
यह घटना न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी चोट है। पत्रकार समाज का चौथा स्तंभ हैं और यदि वे असुरक्षित महसूस करेंगे, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी। प्रशासन, मीडिया और समाज को मिलकर एक ऐसा सुरक्षित वातावरण बनाना होगा जिसमें पत्रकार निडर होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

निष्कर्ष:
बिलासपुर की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकार समुदाय के लिए एक चेतावनी है। यह वक्त है एकजुटता, कार्रवाई और समाधान का। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में पत्रकारिता के लिए स्थितियाँ और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

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